Thursday, June 4, 2020

वन विभाग के उदासीनता के चलते दम तोड़ती संजीवनी योजना

वन विभाग के उदासीनता के चलते दम तोड़ती संजीवनी योजना

 नगर की संजीवनी साल भर से बंद,लोगो को हो रही परेशानी 

राजेश रंगारी

भानुप्रतापपुर।  वन विभाग के उदासीनता के चलते प्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण संजीवनी योजना फैल होती नजर आ रही है। नगर में वर्षों से संचालित हो रही संजीवनी लगभग साल भर से बंद पड़ी हुई है। इसे पुनः संचालित करने में अधिकारी भी रुचि नही दिखा रहे है।
विदित हो कि वनों से प्राप्त होने वाले वनोषधि से तैयार सामग्रियों
का लाभ आमजनों को सहजता से मिल सके व महिला समूहों को स्वरोजगार प्राप्त हो इस उद्देश्य से शासन द्वारा प्रदेश में कई स्थानों पर संजीवनी संस्था खोले गये।
इसीक्रम में  जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित पूर्व भानुप्रतापपुर के द्वारा  भानुप्रतापपुर नगर में वर्ष 13 मार्च 2007 को भाजपा के विधायक देवलाल दुग्गा के द्वारा संजीवनी संस्थान का शुभारंभ किया गया। विभाग ने  संजीवनी संस्था का संचालन के लिए माँ भवानी महिला स्व सहायता समूह भानुप्रतापपुर को प्रभार दिया गया। संस्था की मॉनिटरिंग देखरेख के जिम्मेदारी जिला यूनियन पूर्व भानुप्रतापपुर  में पदस्थ रहे डिप्टी द्वारा किया जाना था।  लेकिन विभागीय के  उदासीनता के चलते सालभर से संजीवनी बंद पड़ा हुआ है। 
 
         वनोषधि के बढ़ते मांग

वनोषधि लोगो के लिए कारगर साबित होने से इसकी लोकप्रियता भी दिनों दिन बढ़ते जा रहे है।
विगत कुछ वर्षो से वनोषधि से बनी दवाइयों एवं वनों से प्राप्त होने अन्य समानो के मांग भी अधिक बना हुआ है, लेकिन संजीवनी  के बंद होने से लोगो को  काफी परेशानिया हो रही है। यहा पर लगभग 40 से 50 प्रकार वनोषधि युक्त समान मिल रहे थे जो अब नही मिल पा रहे है।

         अधिकारी नही ले रहे रुचि

आम नागरिकों को अधिक से अधिक लाभ एवं
स्वरोजगार उपलब्ध हो सके इसके लिए शासन द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही है,उन्ही में से एक संजीवनी है। वनोषधि वनों से संबंधित समान होने के कारण जवाबदेही वन विभाग को सौपी गई है। लेकिन संजीवनी को पुनः खोले जाने को लेकर अधिकारी  रुचि नही दिखा रहे है यही  कारण है कि नगर के संजीवनी साल भर बाद भी नही खुल पाया है।

  क्या कहते है संजीवनी प्रभारी

नारायण यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि जब से मैं संजीवनी का चार्ज लिया हूँ तब से संस्थान बंद है। इसका कोई भी लेखा-जोखा दस्तवेज मेरे पास नही है। वही विभाग के पास भी नही होने की बात कही गई। उनके द्वारा कहा गया कि नए सिरे से दूसरा समूह गठित कर संजीवनी को पुनः प्रारंभ किया जाये।

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